आज कुछ मुस्कुराहटों की बात की जाए,
माहौल की उदासी तो कुछ कम की जाए।
बड़ी सहमी-सहमी सी हो गई जिंदगी इन दिनों ,
तेरी बाँहों के घेरे की बात की जाए।
शिकवे शिकयतों के दौर तो यूँ ही चलते रहेंगे,
अब कुछ मिलने मिलाने की बात की जाए।
इक अरसे से सिर्फ साँसों को हमने जीने का नाम दिया,
अब दिल से जीने की बात की जाए।
जोड़-तोड़ की गांठों से अब उठने लगी है टीस सी,
दोस्ती यारी के मरहम की बात की जाए।
दुखती नज्मों से दिल यह काफी बोझिल है,
अब सिर्फ हँसते लफ्ज़ों की बात की जाए।
© उपमा डागा पार्थ २०१३