मेरी बेटी के लिए एक तोहफा (24 मई 2012):
दुआएं तो बिना बोले सारी ही तुम्हारी है,
फिर भी चंद सतरें कागज पे उतारी हैं,
कुछ मुस्कुराहटें जो मैंने उम्र भर में कमाई है,
वो साथ रहे तेरे ज्यों तेरी ही परछाई है,
मैं चाँद न तारे कभी तेरे लिए ला पाऊंगी,
पर जीवन की दुपहरी में कभी छोड़ के न जाऊंगी,
मेरे बस में अगर होता तुझे आँखों में छुपा लेती,
तेरे सारे ग़मों को मैं हसीं में बदल देती,
मेरे अशार तुझे शायद अब न समझ आयेंगे,
पर शायद यह कभी तुम्हें जिन्दगी के मायने समझाएंगे,
तुम इनको वक़्त की कसौटी पे रख के देख लेना,
इन खट्टे मीठे लफ्जों को कभी यूं ही चख के देख लेना,
कभी यह बन के तेरे हमराज तेरे साथ ही हो लेंगे,
कभी मेरी छुअन बन के तुझे प्यार से यह चूमेंगे,
कभी आ के रातों में तुझे सहला के सुला देंगे,
कभी मेरी तरह आ के तुझे नींद से जगा देंगे,
कभी बस ऐसे ही आ के वो तुझ से लिपट जायेंगे,
हम हैं! बस चुपके से यह एहसास करवा जायेंगे,
हम हैं! बस चुपके से यह एहसास करवा जायेंगे!
© उपमा डागा पार्थ २०१२
I have no words to comment on this..It simply superb......
जवाब देंहटाएंvery true upma this is a life long and lasting gift for mithi . Any way belated happy birthday to mithi.
जवाब देंहटाएंwahoo bhuaa .. u r fantastic .. dancer ke saath poetist bhi ... ???
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