बहुत दम भरते थे तुझे जानने का हम,
आज जाना तो लगा तुझे जानते ही नहीं।
हालातों की धुल सी यूं चेहरे पे पड़ गई,
देखा जो आइना तो लगा खुद को पहचानते ही नहीं।
तेरा हँसता सा चेहरा तो बस आँखों में बस गया,
इस चेहरे की हकीक़त को मगर हम पहचानते ही नहीं।
पूरा घर तो तुमने तस्वीरों से भर दिया,
ख़ाली है पर दिल का कोना लोग यह मानते ही नहीं।
जाने कहाँ तूने अपने अश्कों को बांधा है,
खुश्क आँखों के कोने यह राज जानते ही नहीं।
पानी का है बुलबुला यह पल भर में फूटेगा अब,
मालूम तो है यह हक़ीकत पर हम मानते ही नहीं।
हर कोई यहाँ खुद से इक जंग में उलझा है,
इसे सुलझाने की तरकीब मगर जानते ही नहीं।
© उपमा डागा पार्थ २०१२
आज जाना तो लगा तुझे जानते ही नहीं।
हालातों की धुल सी यूं चेहरे पे पड़ गई,
देखा जो आइना तो लगा खुद को पहचानते ही नहीं।
तेरा हँसता सा चेहरा तो बस आँखों में बस गया,
इस चेहरे की हकीक़त को मगर हम पहचानते ही नहीं।
पूरा घर तो तुमने तस्वीरों से भर दिया,
ख़ाली है पर दिल का कोना लोग यह मानते ही नहीं।
जाने कहाँ तूने अपने अश्कों को बांधा है,
खुश्क आँखों के कोने यह राज जानते ही नहीं।
पानी का है बुलबुला यह पल भर में फूटेगा अब,
मालूम तो है यह हक़ीकत पर हम मानते ही नहीं।
हर कोई यहाँ खुद से इक जंग में उलझा है,
इसे सुलझाने की तरकीब मगर जानते ही नहीं।
© उपमा डागा पार्थ २०१२
बहुत खूब ,बहुत ही सुन्दर, उपमा
जवाब देंहटाएंa nice expression . keep it up
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